| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 102b |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 102b  | कृतजुग त्रेताँ द्वापर पूजा मख अरु जोग।
जो गति होइ सो कलि हरि नाम ते पावहिं लोग॥102 ख॥ | | | | अनुवाद | | | | जो मोक्ष सत्ययुग, त्रेता तथा द्वापर में पूजा, यज्ञ तथा योग से प्राप्त होता है, वही मोक्ष कलियुग में केवल भगवान के नाम से प्राप्त होता है। | | | | The salvation that is attained in Satyayug, Treta and Dwapar by worship, yajna and yoga, the same salvation is attained in Kaliyug only by the name of God. | |
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