श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  चौपाई 94a.1
 
 
काण्ड 7 - चौपाई 94a.1 
तुम्ह सर्बग्य तग्य तम पारा। सुमति सुसील सरल आचारा॥
ग्यान बिरति बिग्यान निवासा। रघुनायक के तुम्ह प्रिय दासा॥1॥
 
अनुवाद
 
 आप सर्वज्ञ, सत्य के ज्ञाता, माया से परे, उत्तम बुद्धि वाले, अच्छे आचरण वाले, सरल आचरण वाले, ज्ञान, त्याग और विज्ञान के धाम तथा श्री रघुनाथजी के प्रिय सेवक हैं।
 
You are omniscient, knower of the truth, beyond darkness (Maya), endowed with excellent intellect, well behaved, of simple conduct, the abode of knowledge, renunciation and science and the beloved servant of Shri Raghunathji.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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