| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » चौपाई 8a.2 |
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| | | | काण्ड 7 - चौपाई 8a.2  | भरत सनेह सील ब्रत नेमा। सादर सब बरनहिं अति प्रेमा॥
देखि नगरबासिन्ह कै रीती। सकल सराहहिं प्रभु पद प्रीती॥2॥ | | | | अनुवाद | | | | वे सब बड़े प्रेम और आदर के साथ भरत के प्रेम, उनके सुंदर स्वभाव, उनके त्याग व्रत और उनके नियमों की प्रशंसा कर रहे हैं। नगरवासियों का (प्रेम, शील और नम्रता से युक्त) आचरण देखकर वे सब भगवान के चरणों में उनके प्रेम की प्रशंसा कर रहे हैं। | | | | All of them are praising Bharata's love, his beautiful nature, his vows (of renunciation) and his rules with great love and respect. Seeing the behaviour of the city dwellers (full of love, modesty and humility), they are all praising his love at the Lord's feet. | |
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