| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » चौपाई 69a.4 |
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| | | | काण्ड 7 - चौपाई 69a.4  | संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही। चितवहिं राम कृपा करि जेही॥
राम कपाँ तव दरसन भयऊ। तव प्रसाद सब संसय गयऊ॥4॥ | | | | अनुवाद | | | | शुद्ध (सच्चा) संत तो उन्हीं को मिलता है जिन पर श्री राम कृपा दृष्टि रखते हैं। श्री राम की कृपा से मैंने आपके दर्शन किए और आपकी कृपा से मेरा संशय दूर हो गया। | | | | A pure (true) saint is found only by those whom Shri Ram looks at with grace. By the grace of Shri Ram, I saw you and by your grace, my doubts have gone away. | |
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