| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » चौपाई 47.1 |
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| | | | काण्ड 7 - चौपाई 47.1  | सुनत सुधा सम बचन राम के । गहे सबनि पद कृपाधाम के॥
जननि जनक गुर बंधु हमारे। कृपा निधान प्रान ते प्यारे॥1॥ | | | | अनुवाद | | | | श्री रामचन्द्रजी के अमृततुल्य वचन सुनकर सबने कृपाधाम के चरण पकड़ लिए (और कहा-) हे कृपानिधि! आप हमारे माता, पिता, गुरु, भाई और सर्वस्व हैं तथा प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं। | | | | On hearing the nectar like words of Shri Ramchandraji, everyone held the feet of Kripadhaam (and said-) O Kripa Nidhi (Lord of Mercy)! You are our mother, father, Guru, brother and everything and dearer to us than our life. | |
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