श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  चौपाई 109a.4
 
 
काण्ड 7 - चौपाई 109a.4 
जनमत मरत दुसह दुख होई। एहि स्वल्पउ नहिं ब्यापिहि सोई॥
कवनेउँ जन्म मिटिहि नहिं ग्याना। सुनहि सूद्र मम बचन प्रवाना॥4॥
 
अनुवाद
 
 परन्तु जन्म-मरण का असह्य दुःख उसे तनिक भी प्रभावित नहीं करेगा और उसका ज्ञान किसी भी जन्म में मिटेगा नहीं। हे शूद्र! मेरे प्रामाणिक (सत्य) वचन सुनो।
 
But the unbearable pain of birth and death will not affect him at all and his knowledge will not be erased in any birth. O Shudra! Listen to my authentic (true) words.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas