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काण्ड 6 - दोहा 95  |
तब रघुबीर पचारे धाए कीस प्रचंड।
कपि बल प्रबल देखि तेहिं कीन्ह प्रगट पाषंड॥95॥ |
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| अनुवाद |
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| तब श्री रघुवीर की ललकार पर महाबली वानर भाग खड़े हुए। वानरों के उस महाबली समूह को देखकर रावण ने अपनी माया का प्रदर्शन किया। |
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| Then on Shri Raghuveer's challenge the mighty monkeys ran. On seeing the strong group of monkeys Ravana displayed his magic. |
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