श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  दोहा 91
 
 
काण्ड 6 - दोहा 91 
तानेउ चाप श्रवन लगि छाँड़े बिसिख कराल।
राम मारगन गन चले लहलहात जनु ब्याल॥91॥
 
अनुवाद
 
 श्री रामचन्द्रजी ने धनुष को कानों तक तानकर भयंकर बाण छोड़े। श्री राम के बाणों का समूह ऐसे उड़ रहा था मानो सर्प डोल रहे हों।
 
Stretching his bow till his ears, Shri Ramachandraji shot terrifying arrows. Shri Rama's group of arrows flew as if snakes were moving swayingly.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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