| श्री रामचरितमानस » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » दोहा 77 |
|
| | | | काण्ड 6 - दोहा 77  | तब दसकंठ बिबिधि बिधि समुझाईं सब नारि।
नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि॥77॥ | | | | अनुवाद | | | | तब रावण ने बहुत प्रकार से सब स्त्रियों को समझाया कि यह (दृश्यमान) सम्पूर्ण जगत् नाशवान है, इसका अपने हृदय में विचार करो। | | | | Then Ravana explained to all the women in many ways that this (visible) form of the entire world is perishable, think about it in your heart. | |
| | ✨ ai-generated | | |
|
|