श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  दोहा 68
 
 
काण्ड 6 - दोहा 68 
छन महुँ प्रभु के सायकन्हि काटे बिकट पिसाच।
पुनि रघुबीर निषंग महुँ प्रबिसे सब नाराच॥68॥
 
अनुवाद
 
 भगवान के बाणों ने क्षण भर में ही भयानक राक्षसों को काट डाला। फिर वे सब बाण लौटकर श्री रघुनाथजी के तरकश में समा गए।
 
The Lord's arrows cut down the terrible demons in a moment. Then all those arrows returned and entered Shri Raghunath's quiver.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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