श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  दोहा 67
 
 
काण्ड 6 - दोहा 67 
सुनु सुग्रीव बिभीषन अनुज सँभारेहु सैन।
मैं देखउँ खल बल दलहि बोले राजिवनैन॥67॥
 
अनुवाद
 
 तब कमल-नेत्र श्री रामजी ने कहा- हे सुग्रीव! हे विभीषण! और हे लक्ष्मण! सुनो, तुम सेना का ध्यान रखो। मैं इस दुष्ट का बल और सेना देख रहा हूँ।
 
Then lotus-eyed Shri Ramji said- O Sugreeva! O Vibhishan! And O Lakshman! Listen, you take care of the army. I can see the strength and army of this evil person.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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