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काण्ड 6 - दोहा 53  |
रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ।
जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ॥53॥ |
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| अनुवाद |
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| गड्ढों में खून जमा हो गया है और धूल उड़कर उस पर गिर रही है (दृश्य ऐसा है) मानो राख ने अंगारों के ढेर को ढक रखा है। |
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| The blood has collected in the pits and dust is flying and falling on it (the scene is such) as if ashes are covering the heaps of embers. |
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