| श्री रामचरितमानस » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » दोहा 52 |
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| | | | काण्ड 6 - दोहा 52  | आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।
लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ॥52॥ | | | | अनुवाद | | | | श्री राम जी से अनुमति लेकर श्री लक्ष्मण जी अंगद आदि वानरों के साथ धनुष-बाण हाथ में लेकर क्रोधपूर्वक चल पड़े। | | | | After seeking permission from Shri Ram Ji, Shri Lakshman Ji moved angrily along with the monkeys like Angad etc., holding bows and arrows in their hands. | |
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