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काण्ड 6 - चौपाई 54.4  |
बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेजपुंज लछिमन उर लागी॥
मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें॥4॥ |
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| अनुवाद |
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| फिर उसने वीरघातिनी शक्ति का प्रयोग किया। वह शक्तिशाली शक्ति लक्ष्मण की छाती पर लगी। शक्ति लगने से वे मूर्छित हो गए। तब मेघनाद अपना भय त्यागकर उनके पास गया। |
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| Then he used Veerghatini Shakti. That powerful Shakti hit Lakshman's chest. He fainted after being hit by the Shakti. Then Meghnad left his fear and went to him. |
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