श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  चौपाई 34a.5
 
 
काण्ड 6 - चौपाई 34a.5 
जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता मैं हारी॥
सुनहु सुभट सब कह दससीसा। पद गहि धरनि पछारहु कीसा॥5॥
 
अनुवाद
 
 (और कहा-) अरे मूर्ख! यदि तू मेरा पैर हटा दे तो श्री रामजी लौट आएँगे, मैं सीताजी को हार गया हूँ। रावण बोला- हे वीरों! सुनो, बंदर का पैर पकड़कर उसे ज़मीन पर पटक दो।
 
(And said-) Oh fool! If you can move my foot then Shri Ramji will return, I have lost Sitaji. Ravana said- Oh all heroes! Listen, catch hold of the monkey's foot and throw him on the ground.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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