| श्री रामचरितमानस » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » चौपाई 33a.3 |
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| | | | काण्ड 6 - चौपाई 33a.3  | रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी॥
सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा॥3॥ | | | | अनुवाद | | | | हे स्त्रियों के चोर! हे कुमार्ग पर चलने वाले! हे दुष्ट, पापों के पुंज, मंदबुद्धि और कामी! मदोन्मत्त होकर तू कैसी-कैसी गालियाँ बक रहा है? हे दुष्ट राक्षस! तू तो मृत्यु का ग्रास बन गया है! | | | | Oh thief of women! Oh you who walks on the wrong path! Oh wicked man, a mass of sins, dull-brained and lustful! What bad words are you uttering in a fit of ecstasy? Oh wicked demon! You have fallen prey to death! | |
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