| श्री रामचरितमानस » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » चौपाई 29.5 |
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| | | | काण्ड 6 - चौपाई 29.5  | सुनु मतिमंद देहि अब पूरा। काटें सीस कि होइअ सूरा॥
इंद्रजालि कहुँ कहिअ न बीरा। काटइ निज कर सकल सरीरा॥5॥ | | | | अनुवाद | | | | अरे मूर्ख! सुनो, अब बस करो। क्या किसी का सिर काट देने से कोई योद्धा हो जाता है? जो भ्रम फैलाता है, उसे योद्धा नहीं कहते, भले ही वो अपने हाथों से अपना पूरा शरीर काट दे! | | | | Hey you fool! Listen, stop it now. Does cutting off someone's head make him a warrior? A person who creates illusions is not called a warrior, even though he cuts off his entire body with his own hands! | |
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