श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  चौपाई 20.1
 
 
काण्ड 6 - चौपाई 20.1 
कह दसकंठ कवन तैं बंदर। मैं रघुबीर दूत दसकंधर॥
मम जनकहि तोहि रही मिताई। तव हित कारन आयउँ भाई॥1॥
 
अनुवाद
 
 रावण ने कहा- हे वानर! तुम कौन हो? (अंगद ने कहा-) हे दशग्रीव! मैं श्री रघुवीर का दूत हूँ। मेरे पिता और तुम मित्र थे, अतः हे भाई! मैं तुम्हारे कल्याण के लिए ही आया हूँ।
 
Ravana said- Hey monkey! Who are you? (Angad said-) Hey Dashagriva! I am the messenger of Shri Raghuveer. My father and you were friends, so hey brother! I have come only for your welfare.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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