| श्री रामचरितमानस » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » चौपाई 116a.2 |
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| | | | काण्ड 6 - चौपाई 116a.2  | सकुल सदल प्रभु रावन मार्यो। पावन जस त्रिभुवन विस्तार्यो॥
दीन मलीन हीन मति जाती। मो पर कृपा कीन्हि बहु भाँती॥2॥ | | | | अनुवाद | | | | आपने रावण को उसके कुल और सेना सहित मार डाला, तीनों लोकों में अपना पवित्र यश फैलाया और मुझ दीन, पापी, मूर्ख और जातिहीन व्यक्ति को अनेक प्रकार से आशीर्वाद दिया। | | | | You killed Ravana along with his clan and army, spread your holy fame in the three worlds and blessed me, the poor, sinful, foolish and casteless person, in many ways. | |
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