| श्री रामचरितमानस » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » दोहा 7 |
|
| | | | काण्ड 5 - दोहा 7  | अस मैं अधम सखा सुनु मोहू पर रघुबीर।
कीन्हीं कृपा सुमिरि गुन भरे बिलोचन नीर॥7॥ | | | | अनुवाद | | | | हे मित्र! सुनो, मैं तो ऐसा अधम हूँ, परन्तु श्री रामचन्द्रजी ने मुझ पर भी दया की है। प्रभु के गुणों का स्मरण करके हनुमानजी के नेत्रों में (प्रेम के) आँसू भर आए। | | | | O friend! Listen, I am such a wretch, but Shri Ramchandraji has shown mercy on me too. Remembering the qualities of the Lord, Hanumanji's eyes filled with tears (of love). | |
| | ✨ ai-generated | | |
|
|