| श्री रामचरितमानस » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » दोहा 44 |
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| | | | काण्ड 5 - दोहा 44  | उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत।
जय कृपाल कहि कपि चले अंगद हनू समेत॥44॥ | | | | अनुवाद | | | | दया के धाम भगवान राम ने मुस्कुराकर कहा, "उसे दोनों ही अवस्थाओं में ले आओ।" तब सुग्रीवजी अंगद और हनुमान के साथ "जय श्री रामजी, कपालु" कहते हुए चले गए। | | | | Lord Ram, the abode of mercy, smiled and said, "Bring him in both the cases." Then Sugrivji along with Angad and Hanuman left, saying, "Jai Shri Ramji, the Kapalu". | |
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