श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  दोहा 22
 
 
काण्ड 5 - दोहा 22 
प्रनतपाल रघुनायक करुना सिंधु खरारि।
गएँ सरन प्रभु राखिहैं तव अपराध बिसारि॥22॥
 
अनुवाद
 
 खर के शत्रु श्री रघुनाथजी शरणागतों के रक्षक और दया के सागर हैं। यदि तुम शरण में आओगे, तो प्रभु तुम्हारा अपराध भूलकर तुम्हें अपनी सुरक्षा में रखेंगे।
 
Khar's enemy Shri Raghunathji is the protector of those who seek refuge and is an ocean of mercy. If you seek refuge, the Lord will forget your crime and keep you under his protection.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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