श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  चौपाई 25.1
 
 
काण्ड 5 - चौपाई 25.1 
पूँछहीन बानर तहँ जाइहि। तब सठ निज नाथहि लइ आइहि॥
जिन्ह कै कीन्हिसि बहुत बड़ाई। देखउ मैं तिन्ह कै प्रभुताई॥1॥
 
अनुवाद
 
 जब यह बिना पूँछ वाला बन्दर वहाँ (अपने स्वामी के पास) जाएगा, तब यह मूर्ख अपने स्वामी को भी साथ ले आएगा। जिनकी इसने इतनी प्रशंसा की है, उनका बल (सामर्थ्य) तो देखूँ!
 
When this tailless monkey goes there (to his master), then this fool will bring his master along with him. Let me see the power (power) of those whom he has praised so much!
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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