| श्री रामचरितमानस » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » चौपाई 21.2 |
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| | | | काण्ड 5 - चौपाई 21.2  | मारे निसिचर केहिं अपराधा। कहु सठ तोहि न प्रान कइ बाधा॥
सुनु रावन ब्रह्मांड निकाया। पाइ जासु बल बिरचति माया॥2॥ | | | | अनुवाद | | | | तूने किस अपराध के कारण राक्षसों का वध किया? अरे मूर्ख! बता, क्या तुझे प्राण जाने का भय नहीं है? (हनुमान जी ने कहा-) हे रावण! सुन, जिस माया की शक्ति पाकर सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों के समूह उत्पन्न होते हैं। | | | | For what crime did you kill the demons? Oh fool! Tell me, are you not afraid of losing your life? (Hanuman Ji said-) Oh Ravana! Listen, by getting the power of which Maya creates groups of entire universes. | |
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