| श्री रामचरितमानस » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » चौपाई 16.1 |
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| | | | काण्ड 5 - चौपाई 16.1  | जौं रघुबीर होति सुधि पाई। करते नहिं बिलंबु रघुराई॥
राम बान रबि उएँ जानकी। तम बरुथ कहँ जातुधान की॥1॥ | | | | अनुवाद | | | | यदि श्री रामचन्द्रजी को समाचार मिल जाता, तो वे विलम्ब न करते। हे जानकीजी! जब रामबाण रूपी सूर्य उदय हो जाता है, तब राक्षसों की सेना रूपी अंधकार कहाँ रह सकता है? | | | | If Shri Ramchandraji had received the news, he would not have delayed. O Janakiji! Where can the darkness in the form of the army of demons remain when the sun in the form of Rambaan rises? | |
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