श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  चौपाई 13.1
 
 
काण्ड 5 - चौपाई 13.1 
तब देखी मुद्रिका मनोहर। राम नाम अंकित अति सुंदर॥
चकित चितव मुदरी पहिचानी। हरष बिषाद हृदयँ अकुलानी॥1॥
 
अनुवाद
 
 तभी उनकी दृष्टि राम नाम से अंकित एक अत्यंत सुंदर एवं मनमोहक अंगूठी पर पड़ी। अंगूठी को पहचानकर सीताजी आश्चर्यचकित होकर उसे देखने लगीं और उनका हृदय हर्ष और शोक से भर गया।
 
Then she saw a very beautiful and charming ring inscribed with the name of Rama. Recognizing the ring, Sitaji was surprised and started looking at it and her heart was filled with joy and sorrow.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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