श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  दोहा 9
 
 
काण्ड 3 - दोहा 9 
निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह।
सकल मुनिन्ह के आश्रमन्हि जाइ जाइ सुख दीन्ह॥9॥
 
अनुवाद
 
 श्री रामजी ने भुजा उठाकर प्रतिज्ञा की कि वे पृथ्वी को राक्षसों से मुक्त कर देंगे। फिर वे सभी आश्रमों में गए और उनसे मिलकर तथा उनसे बातचीत करके उन्हें सुख प्रदान किया।
 
Shri Ramji raised his arm and vowed that he would rid the earth of demons. Then he went to all the hermitages and gave them the pleasure of meeting and talking to them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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