| श्री रामचरितमानस » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » दोहा 25 |
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| | | | काण्ड 3 - दोहा 25  | जेहिं ताड़का सुबाहु हति खंडेउ हर कोदंड।
खर दूषन तिसिरा बधेउ मनुज कि अस बरिबंड॥25॥ | | | | अनुवाद | | | | जिसने ताड़का और सुबाहु को मारा, भगवान शिव का धनुष तोड़ा, खर, दूषण और त्रिशिरा का वध किया, क्या ऐसा शक्तिशाली व्यक्ति कभी हो सकता है? | | | | The one who killed Taraka and Subahu and broke Lord Shiva's bow and killed Khar, Dushan and Trishira, can such a powerful person ever exist? | |
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