श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  दोहा 24
 
 
काण्ड 3 - दोहा 24 
करि पूजा मारीच तब सादर पूछी बात।
कवन हेतु मन ब्यग्र अति अकसर आयहु तात॥24॥
 
अनुवाद
 
 तब मारीच ने आदरपूर्वक उनकी पूजा करके उनसे पूछा- हे प्रिये! तुम्हारा मन इतना व्याकुल क्यों है और तुम अकेले क्यों आये हो?
 
Then Marich after worshipping him respectfully asked him- O dear! Why is your mind so restless and why have you come alone?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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