श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  चौपाई 5a.10
 
 
काण्ड 3 - चौपाई 5a.10 
पति प्रतिकूल जनम जहँ जाई। बिधवा होइ पाइ तरुनाई॥10॥
 
अनुवाद
 
 परन्तु जो स्त्री अपने पति के विरुद्ध जाती है, वह चाहे कहीं भी जन्म ले, युवावस्था में ही विधवा हो जाती है।
 
But she who goes against her husband, becomes a widow at the age of youth, wherever she is born.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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