| श्री रामचरितमानस » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » चौपाई 43.2 |
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| | | | काण्ड 3 - चौपाई 43.2  | तब बिबाह मैं चाहउँ कीन्हा। प्रभु केहि कारन करै न दीन्हा॥
सुनु मुनि तोहि कहउँ सहरोसा। भजहिं जे मोहि तजि सकल भरोसा॥2॥ | | | | अनुवाद | | | | तब मैं विवाह करना चाहता था। हे प्रभु! आपने मुझे विवाह क्यों नहीं करने दिया? (भगवान बोले-) हे मुनि! सुनो, मैं तुमसे प्रसन्नतापूर्वक कहता हूँ कि जो मनुष्य सब आशा और विश्वास छोड़कर केवल मेरी ही भक्ति करते हैं, | | | | Then I wanted to get married. O Lord! Why did you not allow me to get married? (Lord said-) O Muni! Listen, I tell you with joy that those who leave all hope and trust and worship only me, | |
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