| श्री रामचरितमानस » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » चौपाई 19a.1 |
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| | | | काण्ड 3 - चौपाई 19a.1  | प्रभु बिलोकि सर सकहिं न डारी। थकित भई रजनीचर धारी॥
सचिव बोलि बोले खर दूषन। यह कोउ नृपबालक नर भूषन॥1॥ | | | | अनुवाद | | | | (सुन्दरता-माधुर्य) भगवान श्री राम को देखकर राक्षसों की सेना थक गई। वे उन पर बाण नहीं चला सके। मंत्री को बुलाकर खर-दूषण ने कहा- यह राजकुमार मनुष्यों का आभूषण है। | | | | (Beauty-sweetness) Seeing Lord Shri Ram, the army of demons got tired. They could not shoot arrows at him. Calling the minister, Khar-Dushan said- This prince is an ornament of humans. | |
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