| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » दोहा 9 |
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| | | | काण्ड 2 - दोहा 9  | सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि प्रसंस।
राम कस न तुम्ह कहहु अस हंस बंस अवतंस॥9॥ | | | | अनुवाद | | | | (श्री रामचन्द्र के) प्रेमपूर्ण वचन सुनकर वसिष्ठ ऋषि ने श्री रघुनाथजी की स्तुति करके कहा, "हे राम! ऐसा क्यों न कहें? आप तो सूर्यवंश के आभूषण हैं।" | | | | Hearing the words of love (of Shri Ramchandra), sage Vasishtha praised Shri Raghunath and said, O Ram! Why shouldn't you say so? You are the ornament of the Suryavansh. | |
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