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काण्ड 2 - दोहा 53  |
बरष चारिदस बिपिन बसि करि पितु बचन प्रमान।
आइ पाय पुनि देखिहउँ मनु जनि करसि मलान॥53॥ |
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| अनुवाद |
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| मैं चौदह वर्ष तक वन में रहकर अपने पिता के वचनों को सत्य सिद्ध करूँगा। फिर लौटकर आपके चरणों के दर्शन करूँगा। मेरे हृदय को दुःखी न करें। |
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| I will stay in the forest for fourteen years and prove my father's words to be true. Then I will return and see your feet. Do not make my heart sad. |
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