| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » दोहा 46 |
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| | | | काण्ड 2 - दोहा 46  | मुख सुखाहिं लोचन स्रवहिं सोकु न हृदयँ समाइ।
मनहुँ करुन रस कटकई उतरी अवध बजाइ॥46॥ | | | | अनुवाद | | | | सबके चेहरे सूख गए हैं, आँखों से आँसू बह रहे हैं, हृदय में शोक समा नहीं रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो करुणा रस की सेना घोर तुरही बजाती हुई अवध पर उतर आई है। | | | | Everyone's face turns dry, tears flow from the eyes, grief cannot be contained in the heart. It seems as if the army of Karuna Rasa has descended on Awadh with a loud trumpet. | |
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