| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » दोहा 35 |
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| | | | काण्ड 2 - दोहा 35  | मरम बचन सुनि राउ कह कहु कछु दोषु न तोर।
लागेउ तोहि पिसाच जिमि कालु कहावत मोर॥35॥ | | | | अनुवाद | | | | कैकेयी के हृदय विदारक वचन सुनकर राजा बोले, "जो चाहो कहो, इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है। ऐसा लगता है मानो मेरी मृत्यु ने ही राक्षस के रूप में तुम्हें ग्रसित कर लिया है और वही तुमसे यह सब कहलवा रहा है।" | | | | Hearing Kaikeyi's heartrending words, the king said, "Say whatever you want, it is not your fault. It is as if my death has possessed you in the form of a demon, and it is he who is making you say all this." | |
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