| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » दोहा 279 |
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| | | | काण्ड 2 - दोहा 279  | सादर सब कहँ रामगुर पठए भरि भरि भार।
पूजि पितर सुर अतिथि गुर लगे करन फरहार॥279॥ | | | | अनुवाद | | | | श्री राम के गुरु वशिष्ठ ने सबके लिए आदरपूर्वक ढेर सारा भोजन भेजा। फिर उन्होंने अपने पितरों, अतिथियों और गुरु का पूजन करके फलाहार करना शुरू किया। | | | | Shri Ram's Guru Vashishtha sent loads of food respectfully to everyone. Then they started eating fruits after worshipping their ancestors, guests and Guru. | |
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