| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » दोहा 204 |
|
| | | | काण्ड 2 - दोहा 204  | अरथ न धरम न काम रुचि गति न चहउँ निरबान।
जनम-जनम रति राम पद यह बरदानु न आन॥204॥ | | | | अनुवाद | | | | मुझे धन, धर्म, काम में कोई रुचि नहीं है और मैं मोक्ष भी नहीं चाहता। मैं तो केवल यही वर माँगता हूँ कि मुझे हर जन्म में श्री राम के चरणों में प्रेम रहे, इसके अलावा कुछ नहीं। | | | | I have no interest in wealth, religion, sex and I do not even want salvation. I ask for only this boon that I may have love for the feet of Shri Ram in every birth, nothing else. | |
| | ✨ ai-generated | | |
|
|