| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » दोहा 171 |
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| | | | काण्ड 2 - दोहा 171  | सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ।
हानि लाभु जीवनु मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ॥171॥ | | | | अनुवाद | | | | मुनिनाथ रोते हुए बोले- हे भारत! सुनो, भविष्य बड़ा प्रबल है। लाभ-हानि, जीवन-मरण, यश-अपयश, ये सब विधाता के हाथ में हैं। | | | | Muninaath wept and said- O Bharat! Listen, the future is very strong. Profit and loss, life and death, fame and disrepute, all these are in the hands of the Creator. | |
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