| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » दोहा 15 |
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| | | | काण्ड 2 - दोहा 15  | भरत सपथ तोहि सत्य कहु परिहरि कपट दुराउ।
हरष समय बिसमउ करसि कारन मोहि सुनाउ॥15॥ | | | | अनुवाद | | | | मैं तुम्हें भारत की शपथ देता हूँ, सब छल-कपट छोड़कर सत्य बोलो। सुख के समय तुम दुःखी हो रहे हो, इसका कारण बताओ। | | | | I swear to you in the name of Bharat, leave all deceit and tell the truth. You are feeling sad at a time of happiness, tell me the reason for this. | |
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