| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » चौपाई 250.1 |
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| | | | काण्ड 2 - चौपाई 250.1  | कोल किरात भिल्ल बनबासी। मधु सुचि सुंदर स्वादु सुधा सी॥
भरि भरि परन पुटीं रचि रूरी। कंद मूल फल अंकुर जूरी॥1॥ | | | | अनुवाद | | | | कोल, किरात और भील आदि वनवासी सुन्दर कटोरों में सुन्दर एवं अमृततुल्य स्वादिष्ट शहद बनाकर उसमें भरते हैं, साथ ही कन्द, मूल, फल और अंकुर आदि की पोटली भी भरते हैं। | | | | Forest dwellers like Kol, Kirat and Bhil etc. make beautiful and nectar-like tasty honey in beautiful bowls and fill them with it and also bundles of tubers, roots, fruits and sprouts etc. | |
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