| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » चौपाई 188.3 |
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| | | | काण्ड 2 - चौपाई 188.3  | तात चढ़हु रथ बलि महतारी। होइहि प्रिय परिवारु दुखारी॥
तुम्हरें चलत चलिहि सबु लोगू। सकल सोक कृस नहिं मग जोगू॥3॥ | | | | अनुवाद | | | | हे पुत्र! माता प्रार्थना कर रही है कि तुम रथ पर चढ़ जाओ। नहीं तो पूरा परिवार दुःखी हो जाएगा। तुम पैदल चलोगे, तो सब पैदल चलेंगे। दुःख के कारण सब दुबले-पतले हो रहे हैं, पैदल चलने लायक नहीं हैं। | | | | O son! Mother is praying for you to get on the chariot. Otherwise the whole family will be sad. If you walk on foot, everyone will walk on foot. Everyone is becoming thin due to grief, they are not fit to walk on foot. | |
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