| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » चौपाई 179.1 |
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| | | | काण्ड 2 - चौपाई 179.1  | कहउँ साँचु सब सुनि पतिआहू। चाहिअ धरमसील नरनाहू॥
मोहि राजु हठि देइहहु जबहीं। रसा रसातल जाइहि तबहीं॥1॥ | | | | अनुवाद | | | | मैं सच कह रहा हूँ, आप सब मेरी बात मानिए और विश्वास कीजिए, धर्मात्मा व्यक्ति को ही राजा होना चाहिए। जैसे ही आप मुझे राज्य देने की ज़िद करेंगे, पृथ्वी पाताल में डूब जाएगी। | | | | I am telling the truth, all of you should listen and believe me, only a righteous person should be the king. As soon as you insist on giving me the kingdom, the earth will sink into the netherworld. | |
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