| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » चौपाई 132.4 |
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| | | | काण्ड 2 - चौपाई 132.4  | अत्रि आदि मुनिबर बहु बसहीं। करहिं जोग जप तप तन कसहीं॥
चलहु सफल श्रम सब कर करहू। राम देहु गौरव गिरिबरहू॥4॥ | | | | अनुवाद | | | | वहाँ अत्रि आदि अनेक महर्षि निवास करते हैं, जो योग, जप और तप से अपने शरीर को सुदृढ़ बनाते हैं। हे राम! आइए, सबके पुरुषार्थ को सफल कीजिए और महान पर्वत चित्रकूट की भी शोभा बढ़ाइए। | | | | Many great sages like Atri reside there, who strengthen their bodies by practicing yoga, chanting and penance. O Lord Rama! Come, make everyone's efforts successful and also give glory to the great mountain Chitrakoot. | |
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