| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » चौपाई 131.2 |
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| | | | काण्ड 2 - चौपाई 131.2  | गुन तुम्हार समुझइ निज दोसा। जेहि सब भाँति तुम्हार भरोसा॥
राम भगत प्रिय लागहिं जेही। तेहि उर बसहु सहित बैदेही॥2॥ | | | | अनुवाद | | | | जो आपके गुण-दोषों को अपना मानता है, जो सब प्रकार से आप पर विश्वास करता है तथा जो रामभक्तों से प्रेम करता है, उसके हृदय में सीता सहित निवास करो। | | | | Whoever considers your virtues and faults as his own, who trusts you in every way and who loves the devotees of Rama, reside in his heart along with Sita. | |
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