| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » दोहा 9 |
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| | | | काण्ड 1 - दोहा 9  | भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व बिदित गुन एक।
सो बिचारि सुनिहहिं सुमति जिन्ह कें बिमल बिबेक॥9॥ | | | | अनुवाद | | | | मेरी सृष्टि सर्वगुणरहित है, उसमें केवल एक गुण है, जो जगत् को ज्ञात है। उसका विचार करके उत्तम बुद्धि और शुद्ध ज्ञान वाले पुरुष उसे सुनेंगे। | | | | My creation is devoid of all qualities; it has only one quality which is known to the world. After thinking about it, men with good intellect and pure knowledge will listen to it. | |
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