| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » दोहा 7d |
|
| | | | काण्ड 1 - दोहा 7d  | देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब।
बंदउँ किंनर रजनिचर कृपा करहु अब सर्ब॥7 (घ)॥ | | | | अनुवाद | | | | मैं समस्त देवताओं, दानवों, मनुष्यों, नागों, पक्षियों, भूतों, पितरों, गंधर्वों, किन्नरों और रात्रिचर प्राणियों को प्रणाम करता हूँ। अब आप मुझ पर कृपा करें। | | | | I bow to all the gods, demons, humans, serpents, birds, ghosts, ancestors, Gandharvas, Kinnars and nocturnal creatures. Now, please be kind to me. | |
| | ✨ ai-generated | | |
|
|