| श्री रामचरितमानस » काण्ड 1: बाल काण्ड » दोहा 328 |
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| | | | काण्ड 1 - दोहा 328  | सूपोदन सुरभी सरपि सुंदर स्वादु पुनीत।
छन महुँ सब कें परुसि गे चतुर सुआर बिनीत॥328॥ | | | | अनुवाद | | | | चतुर और विनम्र रसोइये ने क्षण भर में ही सबको सुन्दर, स्वादिष्ट और पवित्र दाल-भात (चावल और दाल) और गाय का (सुगंधित) घी परोस दिया। | | | | The clever and humble cook served beautiful, tasty and sacred dal-bhaat (rice and lentils) and cow's (fragrant) ghee to everybody in a moment. | |
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