श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  दोहा 26
 
 
काण्ड 1 - दोहा 26 
नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु।
जो सुमिरत भयो भाँग तें तुलसी तुलसीदासु॥26॥
 
अनुवाद
 
 कलियुग में राम का नाम कल्पतरु (इच्छित वस्तुओं को देने वाला) और कल्याण का धाम (मोक्ष का घर) है, जिसका स्मरण करके तुलसीदासजी भांग के समान (हीन) भी तुलसी के समान (शुद्ध) हो गए॥
 
In Kaliyug, the name of Rama is Kalpataru (giver of desired objects) and abode of welfare (house of salvation), by remembering whom Tulsidas, who was like cannabis (inferior), became like Tulsi (pure).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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