श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  दोहा 159b
 
 
काण्ड 1 - दोहा 159b 
तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलइ सहाइ।
आपुनु आवइ ताहि पहिं ताहि तहाँ लै जाइ॥159(ख)॥
 
अनुवाद
 
 तुलसीदासजी कहते हैं- जैसी नियति (होनहार) होती है, वैसी ही सहायता मिलती है। या तो वह स्वयं उसके पास आती है या उसे वहाँ ले जाती है।
 
Tulsidasji says- As is the destiny (promising), so is the help one gets. Either it comes to him by itself or takes him there.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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